Zee Jaankari: जिस UN में दुनिया के शक्तिशाली देश हों, वो पाई-पाई के लिए मोहताज क्यों है?

Zee Jaankari: जिस UN में दुनिया के शक्तिशाली देश हों, वो पाई-पाई के लिए मोहताज क्यों है?

कई बार आपके घर का बजट बिगड़ गया होगा. और महीने के अंत में कुछ जरूरी खर्चों के लिए आपके पास पैसे नहीं बचे होंगे...और आप अगले महीने की सैलरी का इंतजार कर रहे हों...परिवार में बजट बिगड़ने की बात बहुत सामान्य है...लेकिन क्या आप...इसकी कल्पना कर सकते हैं कि...दुनिया की सबसे बड़ी अतंरराष्ट्रीय संस्था. संयुक्त राष्ट्र का बजट भी बिगड़ सकता है? क्या आप....इसकी कल्पना कर सकते हैं कि....एक ऐसी अतंरराष्ट्रीय संस्था, जो दुनिया के सदस्य देशों के लिए...दिशा निर्देश जारी करती है. उनके लिए नए-नए Guidelines जारी करती है. उसके पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे भी नहीं हैं.

दुनिया की सबसे बड़ी संस्था के आर्थिक संकट को लेकर आपके मन में कई सवाल उठ रहे होंगे. पहला सवाल है... जिस संस्था के सदस्य... दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली देश हों... वो पाई पाई के लिए मोहताज कैसे हो गई ? दूसरा सवाल ये है कि आखिर संयुक्त राष्ट्र का खर्च कौन उठाता है ? और इस खर्च को दुनिया के सभी देशों में कैसे बांटा जाता है ?

और किस देश की हिस्सेदारी कितनी है ? संयुक्त राष्ट्र की स्थापना को 71 वर्ष बीत चुके हैं... इतने वर्षों में दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है... ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि UN में बड़ा बदलाव कब किया जाएगा ? संयुक्त राष्ट्र ने अपने सभी सदस्य देशों को साफ साफ बताया है कि.

अब उसके पास अपने 37 हजार कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए भी पैसे नहीं है . संयुक्त राष्ट्र का इस वर्ष का बजट लगभग 23 हजार करोड़ है जबकि उसे अभी तक सिर्फ 14 हजार करोड़ रुपए ही मिले हैं... यानी UN को अभी और, 9 हजार करोड़ रुपए चाहिए. ग्लोबल संस्थाओं के पैमाने पर देखें तो 23 हजार करोड़ का बजट बहुत ज्यादा नहीं है.

क्योंकि संयुक्त राष्ट्र, दुनिया के 193 देशों के लिए काम करता है. अब आपको बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक संकट की शुरुआत कैसे हुई ? आसान भाषा में समझिए... जैसे आपने घर या गाड़ी के लिए Loan लिया होगा... तो आप तय वक्त पर उसकी EMI देते होंगे... या फिर आप कोई सर्विस इस्तेमाल करते होंगे... तो उसके लिए सही वक्त पर Payment करते होंगे .

लेकिन संयुक्त राष्ट्र को दुनिया के कई देशों ने धोखा दिया है... और उन्होंने UN को अपनी EMI सही वक्त पर नहीं दी है . संयुक्त राष्ट्र... अपना खर्च चलाने और दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए... अपने 193 सदस्य देशों से मिलनेवाली रकम पर निर्भर है . इस वर्ष दुनिया के सिर्फ 34 देशों ने संयुक्त राष्ट्र को वक्त पर पैसा दिया है.

जिसमें भारत भी शामिल है . आपको हैरानी होगी कि छोटे छोटे देशों ने तय वक्त पर UN को राशि दे दी... लेकिन 5 सबसे Powerful देश... अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ने अंतिम तारीख से पहले रकम नहीं दी है .कुल मिलाकर 94 देशों ने संयुक्त राष्ट्र को देर से भुगतान किया है... इस लिस्ट में चीन भी शामिल है.

ये वो देश हैं जिसे संयुक्त राष्ट्र ने बड़े अधिकार दिए हैं . आर्थिक शक्ति के मामले में ये दुनिया के Top देशों में एक हैं. UN में आर्थिक संकट के लिए... सबसे ज्यादा जिम्मेदार वो 64 देश हैं. जिन्होंने अब तक बकाया पैसे नहीं दिए हैं. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इसमें दुनिया का सबसे अमीर देश अमेरिका भी शामिल है .इस लिस्ट में सऊदी अरब, ओमान, ब्राजील, इज़रायल और मैक्सिको जैसे देश हैं .

इन देशों पर किसी प्रकार का आर्थिक संकट नहीं है... लेकिन उन्होंने UN को अबतक भुगतान नहीं किया है. ऐसा करने के पीछे शायद अमीर और शक्तिशाली देशों की वो मानसिकता है... जिसमें वो खुद को सभी नियमों से ऊपर मानते हैं . आपने अपने आस-पास भी इसका उदाहरण देखा होगा . जैसे हमारे देश का मिडिल क्लास अपने लोन की EMI सही वक्त पर देता है.

उसे चिंता होती है कि देरी होने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. लेकिन पूंजीपति अक्सर ऐसा नहीं करते हैं... उन्हें किसी नियम... कानून का डर नहीं होता है . संयुक्त राष्ट्र के धनवान सदस्यों की ये सोच दुनिया में व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश को नुकसान पहुंचा सकती है. और इसपर जल्द रोक लगाने की जरूरत है. अब आपको बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र का खर्च कौन उठाता है ?

और दुनिया का कौन सा देश UN को सबसे ज्यादा Fund देता है? वर्ष 2019 के आंकड़ों के मुताबिक UN का बजट... 23 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है. और इसमें 22 प्रतिशत यानी करीब 47 सौ करोड़ रुपए अमेरिका की देनदारी है... जो उसने अभी तक नहीं दिये हैं . सिर्फ इतना ही नहीं अमेरिका पर वर्ष 2018 का भी 2700 करोड़ रुपए बकाया है.

लेकिन अबतक उसका भी भुगतान नहीं किया गया है . वर्ष 2019 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र के बजट में 165 करोड़ रुपए का योगदान दिया था . इससे पहले वर्ष 2013 में भारत ने सिर्फ 120 करोड़ रुपए दिए थे... यानी पिछले 6 वर्षों में भारत का योगदान 38 प्रतिशत बढ़ गया है .आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका... UN पर इतना ज्यादा खर्च क्यों करता है ? इसकी वजह है संयुक्त राष्ट्र का एक खास नियम... जिसकी मदद से ये तय होता है कि हरेक सदस्य देश कितनी रकम देंगे . किसी भी देश की आमदनी और जनसंख्या के आधार पर ये फैसला किया जाता है कि.

वो UN के बजट में कितनी राशि देंगे . वैसे UN के बजट में सभी 193 सदस्य देश अपना योगदान देते हैं . लेकिन इसके अलावा अगर कोई देश चाहे तो वो अपनी मर्जी से भी UN को Fund दे सकता है . ((UN की सहयोगी संस्थाएं... ऐसी ही सहयोग राशि से चलती है . जैसे UNICEF... UN पर एक आरोप ये भी लगता है कि वो हमेशा ताकतवर देशों के मन मुताबिक काम करता है .

यही वजह है कि पैसे की कमी होने के बाद UN ने सबसे पहले एशिया और अफ्रीका के अपने कार्यक्रमों पर रोक लगाई है . लेकिन Europe और अमेरिका से जुड़े कार्यक्रम पहले की तरह चल रहे हैं .अब भारत के साथ UN कैसे पक्षपात कर रहा है इसे समझिए ...दुनिया में शांति स्थापित रखने के लिए UN के पास अपनी कोई सेना नहीं है .

इसके लिए वो अपने सदस्य देशों पर निर्भर है . वर्ष 1960 में UN Peacekeeping Force ने अपना पहला बड़ा मिशन किया था . इसके बाद से अब तक 70 से ज्यादा मिशन में ये Force शांति बनाए रखने में अपना योगदान दे चुकी है . अभी UN Peacekeeping Force के 1 लाख से ज्यादा सैनिक... दुनिया भर में चल रहे 14 Operations का हिस्सा हैं .

और ऐसे अभियानों में मदद करने में भारत हमेशा आगे रहा है . दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के Mission में शांति सेना भेजने के बदले UN पर भारत का करीब 265 करोड़ रुपए बकाया है .दुनिया के सभी देशों में UN को सबसे ज्यादा भुगतान भारत को करना है . यानी भारत अपना कर्तव्य निभा रहा है लेकिन UN इस मामले में पीछे है .

इस लिस्ट में भारत के अलावा बांग्लादेश, रवांडा, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देश भी शामिल हैं... इन टॉप 5 देशों में भारत के अलावा... दुनिया की कोई Super Power या बड़ी ताकत शामिल नहीं है .आपको ये जानकर भी हैरानी होगी कि UN का दुनिया के अलग अलग देशों पर करीब 14 हजार करोड़ रुपए बकाया है... जिसमें दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका भी शामिल है .

इन आंकड़ों को देखकर लगता है कि अपने सदस्य देशों के प्रति UN का रवैया भेदभावपूर्ण है. संयुक्त राष्ट्र में भारत अपना योगदान देता है... लेकिन इसके बदले... भारत को बकाया रकम का भुगतान नहीं किया गया है. और जो देश संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक संकट के लिए जिम्मेदार हैं... वो UN में अपने पद और ताकत का फायदा उठाते रहते हैं .

UN की ये दिक्कतें आपको किसी परिवार जैसी लग रही होंगी. जिसका एक बेटा युधिष्ठिर की तरह अनुशासित है... और अपनी जिम्मेदारियों को भी समझता है... यहां हमारा देश भारत... UN का एक अनुशासित. सदस्य है. भारत सही समय पर अपनी योगदान राशि देता है..और UN के सभी नियमों का पालन करता है .लेकिन इसी परिवार में दुर्योधन जैसे सदस्य भी हैं.

जो छल और कुटिलता के सहारे अपना काम बनाने की कोशिशों में लगे रहते हैं . पाकिस्तान और चीन... UN के ऐसे ही सदस्य हैं... जो संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ अपना एजेंडा चलाने के लिए करते रहते हैं .वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई थी . 50 के दशक में विश्व में दो महाशक्तियां थीं...

लेकिन बदलते वक्त के साथ अब दुनिया में कई महाशक्तियां हैं... इसलिए अब संयुक्त राष्ट्र में भी बड़ा बदलाव जरूरी है. UN की स्थापना के समय इसमें सिर्फ 51 सदस्य देश थे... जो अब बढ़कर 193 हो चुके हैं . भारत... संयुक्त राष्ट्र के उन प्रारंभिक सदस्यों में शामिल था... जिन्होंने वर्ष 1942 में संयुक्त राष्ट्र घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे .

((और वर्ष 1945 में ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय संगठन सम्मेलन में भी हिस्सा लिया था. UN की स्थापना दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए हुई थी... लेकिन संयुक्त राष्ट्र अपने उदेश्यों को पूरा नहीं कर पाया है . वर्ष 1947 में पाकिस्तान ने घुसपैठ करके जबरन जम्मू कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया था.

जिसे PoK यानी पाकिस्तानी कब्जे वाला कश्मीर कहा जाता है . उस वक्त जम्मू कश्मीर के शासक... महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे. 1 जनवरी 1948 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू... इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र गए थे . हालांकि तब भारत के गृह मंत्री सरदार पटेल ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था .इसके बाद... वर्ष 1971 तक, UN कश्मीर मुद्दे का कोई हल नहीं निकाल पाया .

इस बीच भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1965 और 1971 में दो और युद्ध हो गए थे .वर्ष 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ... जिसमें दोनों देशों ने मिलकर कश्मीर मसले को हल करने का समझौता किया था .यानी UN जैसी संस्था के होने के बावजूद दुनिया में कई बड़ी घटनाएं हुईं.

जिनपर संयुक्त राष्ट्र का कोई कंट्रोल नहीं था .आप कह सकते हैं UN एक पुराना परिवार है... इसमें अनुभवी सदस्य तो हैं लेकिन... इसे सुधार और नए जमाने के विचारों की बहुत जरूरत है . पिछले 7 दशकों में दुनिया के सिर्फ 5 देशों का UN में दबदबा रहा है . अब वक्त आ गया है कि UN का नया अवतार..

आतंकवाद जैसी समस्याओं का मुकाबला करके... शांति स्थापित करे . और इस बदलाव की शुरुआत भारत जैसे युवा देश को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता देकर की जा सकती है.

 


(Disclaimer: This article is not written By 24Trends, Above article copied from Zee News.)